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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 18
दधिसदृशात्रो नीलो भानुच्छादी खमध्यगोऽभ्रतरुः । पीतच्छुरिताश्च घना घनमूला भूरिवृष्टिकराः ॥
दही के समान अग्र भाग वाले, नोल वर्ण के भाग से सूर्य को आच्छादित करने बाले, आकाश के मध्य में स्थित, पीले रङ्ग से रंगे और मूल की तरफ सघन मेघवृक्ष हों तो अधिक वृष्टि करते हैं।
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