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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 17
शखभयातङ्ककरो दृष्टः प्राङ् मध्यसन्धिषु दिनस्य । शुक्लाद्यो विप्रादीन् यदभिमुखस्तां निहन्ति दिशम् ॥
यदि यह दण्ड सूर्योदय, मध्याह या सूर्यास्त काल में दिखाई दे तो शस्रभय और उपद्रव करता है तथा बेत वर्ण का हो तो ब्राह्मणों का, रक्तवर्ण का हो तो क्षत्रियों का, पीत वर्ण का हो तो वैश्यों का और कृष्ण वर्ण का हो तो शूद्रों का नाश करता है। साथ ही यह जिस दिशा के सम्मुख स्थित हो, उस दिशा का नाश करता है। सूर्य के समीप का इसका भाग मूल और दूसरी तरफ मुख होता है।
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