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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 16
रविकिरणजलदमरुतां सङ्घातो दण्डवत्स्थितो दण्डः । स विदिक्स्थितो नृपाणामशुभो दिक्षु द्विजादीनाम् ॥
सूर्यकिरण, मेघ, वायु-ये तीनों मिलकर दण्ड की तरह स्थित हों तो उसको दण्ड कहते हैं। यह दण्ड कोणों में स्थित हो तो राजाओं का और दिशाओं में स्थित हो तो चारो वर्णों का अशुभ करता है।
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