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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 14
माञ्जिष्ठाभाः शखाग्निसम्भ्रमं वद्भवः पवनवृष्टिम् । भस्मसदृशास्त्ववृष्टिं तनुभावं शवलकल्माषाः ॥
मजीठ वर्ण की हो तो शत्र तथा अग्नि से भय, पीले हों तो वायु के झकोरों से युक्त वर्षा, भस्मसमान हो तो अनावृष्टि, सफेद, काले, नीले, पोले इन सब मिले हुये वर्षों की तरह हो तो बहुत ही कम वर्षा होती है।
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