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बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 12
कत्माषवध्रुकपिला विचित्रमाविष्ट हरितशबलाभाः । त्रिदिवानुबन्धिनोऽ वृष्टयेऽल्पभयदास्तु सप्ताहात् ॥
कल्माष (पोला, बेत और काला वर्ष मिश्रित), बोदे पोले, विचित्र, मझीठ (मजीठ) की तरह हरे, काला-चेत दोनों मिले हुये और सम्पूर्ण आकारामण्डल को व्याप्त करके स्थित सूर्य के किरण दिखाई दें तो उसके सात दिन बाद से वृष्टि और बोड़ा भय करते हैं।
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