मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 30 • श्लोक 1
अस्तिमितानुदितात् सूर्यादस्पष्टभं नभो यावत् । तावत् सन्ध्याकालश्चिह्ररेतैः फलं चास्मिन् ॥
अर्जास्त सूर्यविम्ब के बाद आकाश में नक्षत्रगण अच्छी तरह नहीं दिखाई देने तक एक सन्ध्या (सायं सन्ध्या) और नक्षत्रों के स्वल्प कान्ति होने के बाद अद्धोंदित सूर्य विम्ब होने तक दूसरी (सायं सन्ध्या) होती है। लक्षणों के द्वारा इसका फल आगे कहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें