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बृहत्संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 37
दिवसकृतः प्रतिसूर्यो जलकृदुदग् दक्षिणे स्थितोऽनिलकृत् । उभयस्थः सलिलभयं नृपमुपरि निहन्त्यधो जनहा ॥
यदि नकली सूर्य (प्रभामंडल) सूर्य के उत्तर में हो, तो मूर्च्छा होगी; यदि दक्षिण की ओर हो तो बाढ़ का खतरा रहेगा; यदि ऊपर हो तो राजा को ख़तरा होगा; यदि नीचे (क्षितिज की ओर) तो प्रजा नष्ट हो जायेगी।
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