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बृहत्संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 22
चित्रोऽथवापि धूम्रो रविरश्मिर्व्याकुलां करोत्यूर्धं (महीं) । तस्करशस्त्रनिपातैः यदि सलिलं नाशु पातयति ॥
यदि सूर्य की ऊर्ध्वगामी किरणों का रंग भिन्न-भिन्न या धुँधला हो और उसके बाद तुरंत वर्षा न हो तो यह चोरों, हथियारों के टकराव आदि के माध्यम से देश में अराजकता और आपदा का कारण बनता है।
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