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बृहत्संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 2
सांप्रतमयनं सवितुः कर्कटकाद्यम् मृगादितश्चान्यत् । उक्ताभावो विकृतिः प्रत्यक्षपरीक्सणैः व्यक्तिः ॥
वर्तमान समय में सूर्य की एक गति कर्कटक के प्रारम्भ से तथा दूसरी मकर के प्रारम्भ से प्रारम्भ होती है। यह ऊपर बताई गई बातों से भिन्न है, इसे प्रत्यक्ष अवलोकन द्वारा आसानी से सुनिश्चित किया जा सकता है।
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