विन्द्याच्च रक्तोत्पलेन राजा मन्त्री
सिन्धुवारेण मौक्तिकं
कारुकाः कुसुम्भेन ।
नीलोत्पलेनोक्तः ॥
सिन्धुयास से मोती, कुसुम्भ से केशर, रक्त कमल से राजा और नील कमल से मन्त्री की वृद्धि देखनी चाहिये ।
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