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बृहत्संहिता • अध्याय 29 • श्लोक 8
चम्पककुसुमैः कनकं विद्रुमसम्पच्च वन्धुजीवेन । कुरवकवृद्धा वनं वैदूर्य नन्दिकावर्तः ॥
चम्पापुष्प की वृद्धि से सोना, बन्धुजीव से मूंगा, कुरवक से यज्ञ और नन्दिकावर्त से वैदूर्य मणि को वृद्धि होती है।
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