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बृहत्संहिता • अध्याय 29 • श्लोक 5
अतिमुक्तककुन्दाभ्यां कर्पासं सर्पपान् वदेदशनैः । बदरीभिश्च कुलत्थांश्चिरबिल्वेनादिशेन्मुद्‌गान् ॥
यासन्ती लता और कुन्द पुष्यों में फल-पुष्पों को वृद्धि से कृपास, असना से सरसों, बेर से कुलथी और करन में फल-पुष्पों की वृद्धि से मूंग की वृद्धि जाननी चाहिये।
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