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बृहत्संहिता • अध्याय 29 • श्लोक 4
जम्बूभिस्तिलमाषाः शिरीषवृद्ध्या च कङ्घनिष्पत्तिः । गोधूमाश्च सप्तपर्णेन ॥
जामुन से तिल, माप आदि, शिरीष (शिरस) से प्रियङ्गु (कफुनी = कौनी ), महुए से गेहूँ और सप्तवर्ण वृक्ष पर फल, फूल की वृद्धि से यव की वृद्धि जाननी चाहिये।
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