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बृहत्संहिता • अध्याय 29 • श्लोक 3
न्यप्रोधेन तु ययकस्तिन्दुकवृद्धया च पष्टिको भवति । अश्वत्थेन ज्ञेया निष्पत्तिः सर्वसस्यानाम् ॥
वटवृक्ष से यन, तिन्दुक (तेंदुआ) से साठी धान्य और पीपल से सब धान्यों की वृद्धि देखनी चाहिये।
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