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बृहत्संहिता • अध्याय 29 • श्लोक 13
दूर्वाकुशकुसुमाध्यामिक्षुर्वह्निश्च कोविदारेण । श्यामालताभिवृद्धया बन्धक्यो वृद्धिमायान्ति ॥
दूब और कुश के पुष्पों की वृद्धि से ईख (गन्ना), कचनार से आग और श्याम लता की वृद्धि से वेश्या, व्यभिचारिणी आदि खो की वृद्धि होती है।
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