तरुशिखरोपगताः कृकलासा गगनतलस्थितद्दिष्टनिपाताः । यदि च गवां रविवीक्षणमूर्ध्व निपतति वारि तदा न चिरेण ॥
यदि वृक्ष के शिखर पर स्थित होकर कुकलास (गिरगिट आकाश की तरफ
देखता हो और गायें ऊपर को दृष्टि करके सूर्य को देखती हों तो शीघ्र वृष्टि होती है।
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