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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 7
विनोपपातेन पिपीलिकानामण्डोपसंक्रान्तिरहिव्यवायः । द्रुमावरोहश्च भुजङ्गमानां वृष्टेर्निमित्तानि गवां प्लुतञ्च ॥
यदि विना कारण चोटियाँ अपने अण्डों को एक जगह से दूसरी जगह ले जायें, सर्पों का मैथुन हो, सर्प वृक्ष पर चढ़े या गी विना कारण उछले हो तो शोघ्र वृष्टि होगी।
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