गिरयोऽञ्जनचूर्णसन्निभा यदि वा बाष्पनिरुद्धकन्दराः । कृकवाकुविलोचनोपमाः परिवेषाः शशिनश्च वृष्टिदाः ॥
यदि अञ्जनचूर्ण के समान पर्वत, वाष्म से भरी हुई गुफा, जल में रहने वाले मुर्गे के नेत्र के समान (अति लोहित) चन्द्रकिरण हो तो शोघ्र वृष्टि होती है।
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