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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 5
मार्जारा भृशमवनिं नखैर्लिखन्तो लोहानां मलनिचयः सविस्रगन्यः । रथ्यायां शिशुरचिताच सेतुबन्धाः सम्प्राप्तं जलमचिरान्निवेदयन्ति ॥
यदि पिल्ली बार-बार अपने नाखून से भूमि को खोदे, लोहों में विस्र (कच्चे मांस) को गन्ध से युत मत हो जाय या मार्ग में बालकों से रचित पुल दिखाई दे तो शीघ्र पुष्टि होगी- ऐसा कहना चाहिये ।
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