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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 20
प्रायो ग्रहाणामुदयाम् काले समागमे मण्डलसंक्रमे च। पक्षक्षये तीक्ष्णकरायनान्ते वृष्टिर्गतेऽर्के नियमेन चार्बाम् ॥
ग्रहों के उदय या अस्तकाल में, चन्द्र के साथ समागम होने पर, मण्डल (शुक्रचारोक्त छ: मण्डल) में प्रवेश होने पर, पक्ष के अन्त में, सूर्य के दक्षिणायनान्त और उत्तरायणान्त ( कर्क और मकर संक्रान्ति) में तया सूर्य के आद्रां नक्षत्र में स्थित होने पर निक्ष्य करके सृष्टि होती है।
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