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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 2
आर्द्र द्रव्यं स्पृशति यदि वा वारि तत्संज्ञकं वा तोयासन्नो भवति यदि वा तोयकार्योन्मुखो वा। प्रष्टा वाच्यः सलिलमचिरादस्ति निःसंशयेन पृच्छाकाले सलिलमिति वा श्रूयते यत्र शब्दः ॥
यदि वर्षासम्बन्धी प्रश्न में प्रश्नकर्ता गीली वस्तु, जल, जलसंज्ञक वस्तु (क्षीर, अभ्य इत्यादि) का स्पर्श करे, जल के समीप में स्थित हो, जलसम्बन्धी किसी कार्य में लगा हो या किसी अन्य के द्वारा जल शब्द सुनने में आये तो निःसन्देह शीघ्र ही वृष्टि होती
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