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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 19
प्रावृषि शीतकरो भृगुपुत्रात् सप्तमराशिगतः शुभदृष्टः । सूर्यसुतान्नवपञ्चमगो वा सप्तमगश्च जलाऽऽ गमनाय ॥
यदि वर्षाकाल में शुक से सप्तम राशि में स्थित होकर चन्द्रमा शुभग्रह से देखा जाता हो अथवा शनैश्वर से नवम या पञ्चम में स्थित होकर शुभग्रह से देखा जाता हो तो जल के आगमन के लिये होता है।
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