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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 18
यद्यमोघकिरणाः सहस्रगोरस्तभूधरकरा इवोच्छ्रिताः । भूसमं च रसते यदाम्बुदस्तन्महद्भवति वृष्टिलक्षणम् ॥
यदि हजार, अमोघ ( ३० अध्याय ११ वें श्लोक में पठित), अस्ताचल पर्वत के हाथ की तरह उन्नत सूर्य के किरण दिखाई दें और मेघ पृथ्वी के निकट आकर गर्ने तो वर्षा होने का उत्तम योग होता है।
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