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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 17
यदि तित्तिरपत्रनिभं गगनं मुदिताः प्रवदन्ति च पक्षिगणाः । उदयास्तमये सवितुर्गुनिशं विसृजन्ति घना न चिरेण जलम् ॥
यदि उदय या अस्तसमय तित्तिर के पंख के समान आकाश हो और आनन्दित होकर पक्षी गण शब्द करें तो क्रम से दिन और रात्रि में शीघ्र अति वृष्टि होती है। जैसे उदयकाल में उक्त लक्षण हो तो दिन में और अस्तकाल में हो तो रात्रि में अति वृष्टि होती है।
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