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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 16
शक्रचापपरिघप्रतिसूर्या रोहितोऽथ तडितः परिवेषः । उद्रमास्तसमये यदि भानोरादिशेत् प्रचुरमम्बु तदाशु ॥
यदि सूर्य के उदय या अस्त समय में इन्द्रधनु, परिघ (४७ वें अध्याय के १९ वें स्लोक में पठित), दूसरा सूर्य, रोहित ( ४७ अ. २० श्लोक) या सूर्य-चन्द्र का परिवेष दिखाई दे तो शीघ्र अधिक वृष्टि होती है।
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