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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 14
मयूरशुकचापचातकसमानवर्णा जपाकुसुमपङ्कजद्युतिमुपश्च जलोर्मिनगनक्रकच्छपवराहमीनोपमाः प्रभूतपुटसञ्चया नतु चिरेण यच्छन्त्यपः ॥
मपूर, तोता, चाप (नीलकण्ठ), घातक, जपापुष्प या कमल के समान कान्ति वाले तया जल के आवर्त (भँवर), पर्वत, नक (नाक), कतुआ, सूअर या मछली के समान आकृति याले मेष हों तो शीघ्र मृष्टि करते हैं।
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