स्तनितं निशि विद्युतो दिया रुधिरनिभा यदि दण्डवस्थिताः ।
पवनः पुरतश्च शीतलो यदि सलिलस्य तदाऽऽगमो भवेत् ॥
यदि रात में मेष फा गर्जन हो, दिन में सथिर के समान दण्डाकार विजली दिखाई दे
तथा पूर्व दिशा को उण्दी हया चले तो मर्षा का आगम होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।