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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 12
स्तनितं निशि विद्युतो दिया रुधिरनिभा यदि दण्डवस्थिताः । पवनः पुरतश्च शीतलो यदि सलिलस्य तदाऽऽगमो भवेत् ॥
यदि रात में मेष फा गर्जन हो, दिन में सथिर के समान दण्डाकार विजली दिखाई दे तथा पूर्व दिशा को उण्दी हया चले तो मर्षा का आगम होता है।
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