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बृहत्संहिता • अध्याय 28 • श्लोक 11
शुककपोतविलोचनसन्निभो मधुनिमश्च यदा हिमदीधितिः । प्रतिशशी च यदा दिवि राजते पतति वारि तदा न चिरेण च ॥
जिस समय तोता या कबूतर के नेत्र के समान या शहद की तरह चन्द्र हो या आकाश में दूसरा चन्द्र दिखाई दे तो शीघ्र वृष्टि होती है।
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