यदा स्थिता गृहपटलेषु कुक्कुरा रुदन्ति वा यदि विततं वियन्मुखाः । दिवा तडिद्यदि च पिनाकिदिग्भवा तदा क्षमा भवति समैव वारिणा ॥
जब पर के आच्छादन (छतों पर) पर स्थित होकर आकाश की तरफ देखता हुआ
कुता भूके तथा ईशान कोण में बिजली दिखाई दे तब जल से पृथ्यो समान हो जाती है
अर्थात् अधिक वृष्टि होती है ।
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