वर्षाप्रश्ने सलिलनिलयं राशिमाश्रित्य चन्द्रो लग्नं यातो भवति यदि वा केन्द्रगः शुक्लपक्षे। सौम्यैर्दृष्टः प्रचुरमुदकं पापदृष्टोऽल्पमम्भः प्रावृट्काले सृजति न चिराच्चन्द्रवद्भार्गवोऽपि ॥
कृष्ण पक्ष में वर्षा-खम्बन्धी प्रश्न करने पर यदि जलचर राशि में स्थित होकर चन्द्रमा लग्न में बैठा हो या शुक्ल पक्ष में जलचर राशि में स्थित होकर केन्द्र (चतुर्य, सप्तम या दसम ) में बैठा हो और इन दोनों योगों में यदि चन्द्रमा शुभग्रह से दृष्ट हो हो बहुत जल्दी अधिक वृष्टि और पापग्रह से दृष्ट हो तो घोड़ी वृष्टि होती है।
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