इस योग में 'आषाढ शुक्ल पूर्णिमा के [त सूर्यास्त के समय में' समुद्र के समीप छोटी इलायचो, लवलो और लौंग के वृक्षों को घुमाते हुये यदि नैऋत्य तरफ की हवा चले तो भूख, प्यास से मरे हुए मनुष्यों की हड्डियों के टुकड़े की विस्तृति के भार से व्याप्त पृथ्वी उन्मत्त और अति चहल प्रेतवधू को तरह दिखाई देती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।