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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 9
हैमी प्रधाना रजतेन मध्या तयोरलाभे खदिरेण कार्या। विद्धः पुमान् येन शरेण सा वा तुला प्रमाणेन भवेद्वितस्तिः ॥
सुवर्ण का तुलादण्ड (डण्डी) श्रेष्ठ, चाँदी का मध्यम और इन दोनों के अलाभ में खैर की लकड़ी का तुलादण्ड बनाना चाहिये अथवा जिस बाण से कोई मनुष्य बेधित हुआ हो, उसका तुलादण्ड बनाना चाहिये। वह तुलादण्ड बारह अद्भुत प्रमाण का होना चाहिये।
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