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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 7
याम्ये शिक्ये काञ्चनं सन्निवेश्यं शेषद्रव्याण्युत्तरेऽम्बूनि चैव । तोयैः कौप्यैः सैन्धवैः सारसैश्च वृष्टिींना मध्यमा चोत्तमा च ॥
दक्षिण तरफ के पलड़े पर सुवर्ण और उत्तर तरफ के पलड़े पर कूप, नदी या सरोवर के जल के साथ शेष द्रव्य का स्थापन करे। यदि प्रथम दिन की अपेक्षा द्वितीय दिन में कूप का जल बढ़ जाय तो अवृष्टि, नदी का जल बढ़ जाय तो मध्यम वृष्टि और सरोवर का जल बढ़ जाय तो उत्तम वृष्टि होती है।
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