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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 5
ब्रह्मणो दुहितासि त्वमादित्येति प्रकीर्तिता। काश्यपी गोत्रत चैव नामतो विश्रुता तुला ॥
तुम ब्रह्मा जी की पुत्री हो; पर आदित्या (अदिति की पुत्री) कहलाती हो, गोज से कश्यप गोत्र की हो और तुला के नाम से विख्यात हो ।
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