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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 3
येन सत्येन चन्द्राकों प्रहा ज्योतिर्गणास्तथा। उत्तिष्ठन्तीह पूर्वेण पश्चादस्तं व्रजन्ति च ॥
क्योंकि तुम सत्य व्रत वाली हो। जिस सत्य से चन्द्र, सूर्य, कुजादि ग्रह और नक्षत्रगण पूर्व दिशा में उदित होकर पश्चिम में अस्त होते हैं, जो सत्य सब वेदों में है
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