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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 13
निष्पत्तिरग्निकोपो वृष्टिर्मन्दाथ मध्यमा श्रेष्ठा। बहुजलपवना पुष्टा शुभा च पूर्वादिभिः पवनैः ॥
उक्त तोनों योगों के समय यदि पूर्व दिशा को हवा चले तो धान्यों को उत्तम निष्पत्ति, आग्नेय कोण की हवा चले तो अग्निकोप, दक्षिण दिशा की हवा चले तो थोड़ी दृष्टि, नैऋत्य कोण की हवा चले तो मध्यम वृष्टि, पश्चिम दिशा को हवा चले तो उत्तम वृष्टि, वायव्य कोण की हवा चले तो अधिक वृष्टि, उत्तर दिशा की हवा चले तो सुन्दर वृष्टि और ईशान कोण की हवा चले तो उत्तम वृष्टि होती है ।
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