तीनों (रोहिणी, स्वाती और आषाढी) भोगों का फल था दो योगों का फल समान
हो तो निःसन्देह मही फल कहना चाहिये। यदि तीनों का अलग-अलग फल हो तो
अधिकतर रोहिणी योग का फल ही उस वर्ष में कड़ना चाहिये ।
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