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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 12
त्रयोऽपि योगाः सदृशाः फलेन यदा तदा वाच्यमसंशयेन । विपर्यये यत्विह रोहिणीजं फलं तदेवाभ्यधिकं निगद्यम् ॥
तीनों (रोहिणी, स्वाती और आषाढी) भोगों का फल था दो योगों का फल समान हो तो निःसन्देह मही फल कहना चाहिये। यदि तीनों का अलग-अलग फल हो तो अधिकतर रोहिणी योग का फल ही उस वर्ष में कड़ना चाहिये ।
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