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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 11
स्वातावषाढास्वथ रोहिणीषु पापग्रहा योगगता न शस्ताः । ग्राह्यं तु योगद्वयमप्युपोष्य यदाधिमासो द्विगुणीकरोति ॥
स्वाती, उत्तराषाढा या रोहिणी नक्षत्रगत चन्द्र के साथ यदि पापग्रह ( मंगल, शनि, राहु या केतु) का योग हो तो शुभ नहीं होता है।
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