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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 10
हीनस्य नाशोऽ भ्यधिकस्य वृद्धिस्तुल्येन तुल्यं तुलितं तुलायाम् । एतत्तुलाकोशरहस्यमुक्तं प्राजेशयोगेऽपि नरो विदध्यात् ।
दूसरे दिन में तोला हुआ द्रव्य अल्प हो तो उस वर्ष में उसका नाश, अधिक हो तो वृद्धि और समान हो तो मध्यम फल होता है। यह परम गोपनीय तुला का रहस्य मैंने कहा है। रोहिणी योगकाल में भी इसका विचार करना चाहिये ।
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