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बृहत्संहिता • अध्याय 26 • श्लोक 1
आषाड्यां समतुलिताधिवासिताना - मन्येद्युर्यदधिकतामुपैति बीजम् । तदृष्टिर्भवति न जायते यदूनं मन्त्रोऽस्मिन् भवति तुलाभिमन्त्रणाय ॥
आषाढ शुक्ल पूर्णिमा के दिन उत्तराषाढा नक्षत्रगत चन्द्र के समय बराबर सब धान्यों को अभिमन्त्रित तराजू से अलग-अलग तौल कर रख दे। दूसरे दिन उन सबों को फिर तोले। जो धान्य बढ़ जाय उसकी उस वर्ष में वृद्धि और जो कम हो जाय उसको हानि होती है। तुला को अभिमन्त्रित करने के लिये समाससंहिता में मन्त्र दिया गया है, जो भट्टोत्पलविवृति में द्रष्टव्य है ।
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