सप्तम्यां स्वातियोगे यदि पतति हिमं माघमासान्धकारे वायुर्वा चण्डवेगः सजलजलघरो वापि गर्जत्यजस्त्रम् । विद्युन्मालाकुलं वा यदि भवति नभो नष्टचन्द्रार्कतारं विज्ञेया प्रावृडेषा मुदितजनपदा सर्वसस्यैरुपेता ॥
यदि माघ कृष्ण सप्तमी में स्वाती नक्षत्रगत चन्द्र होने के समय हिम गिरे, भयङ्कर
वायु चले, जलयुत मेघ गर्ने, विद्युन्माला से व्याप्त आकाश रहे तथा मेघाच्छन्न होने के
कारण चन्द्र, सूर्य और तारा न दिखाई दे तो वर्षाकाल में आनन्दित और सब धान्यों से युक्त
जनपद जानना चाहिये ।
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