मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 25 • श्लोक 3
वृष्टेऽह्निभागे प्रथमे सुवृष्टिस्तद्वद् द्वितीये तु सकीटसर्पा । वृष्टिस्तु मध्यापर भागवृष्टेनिश्छिद्रवृष्टिद्युनिशं प्रवृष्टे ॥
दिन के प्रथम भाग में सुन्दर वृष्टि, द्वितीय भाग में कीड़े और साँपों से युत वृष्टि तथा तृतीय भाग में सृष्टि हो तो मध्यम वृष्टि होती है। यदि सम्पूर्ण दिन और रात में वृष्टि हो तो वर्षाकाल में दोषरहित वृष्टि होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें