दिन के प्रथम भाग में सुन्दर वृष्टि, द्वितीय भाग में कीड़े और साँपों से युत वृष्टि
तथा तृतीय भाग में सृष्टि हो तो मध्यम वृष्टि होती है। यदि सम्पूर्ण दिन और रात में वृष्टि
हो तो वर्षाकाल में दोषरहित वृष्टि होती है।
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