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बृहत्संहिता • अध्याय 25 • श्लोक 1
यद्रोहिणीयोगफलं तदेव स्वातावषाढासहिते च चन्द्रे। आषाढशुक्ले निखिलं विचिन्त्यं योऽस्मिन् विशेषस्तमहं प्रवक्ष्ये ॥
रोहिणी योग में उक्त सभी फलों की तरह आषाढ़ शुक्ल में स्वाती नक्षत्र में स्थित बन्द्र के समस्त फलों का विचार करना चाहिये तथा इस (स्वाती योग में जो विशेष फल है, उन्हें में कहता हूँ।
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