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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 9
श्लक्ष्णां पताकामसितां विदध्याद्दण्डप्रमाणां त्रिगुणोच्छ्रिताञ्च । आदी कृते दिग्ग्रहणे नभस्वान् ग्राह्यस्तया योगगते शशाङ्के ॥
बारह हाथ ऊँचे बाँस पर पतली और दण्डप्रमाण (चार हाथ लम्बी) पताका बाँधे। पहले दिग्ज्ञान करके रोहिणीयोग में स्थित चन्द्र के समय में उस पताका द्वारा किस तरफ की वायु है इसका ज्ञान करना चाहिये।
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