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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 8
आलभ्य मन्त्रेण महाव्रतेन बीजानि सर्वाणि निधाय कुम्भे । प्लाव्यानि चामीकरदर्भतोयैहोंमो मरुद्वारुणसोममन्त्रैः ॥
बाद में महाव्रत नामक मन्त्र से अभिमन्त्रित सभी चीजों को कलश में डालकर सुवर्ण और कुशायुत जल से परिपूर्ण करे तथा वायु, वरुण और चन्द्र के मन्त्र से हवन करे ।
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