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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 7
सरलतोयौषधिभिश्चतुर्दिशं तरुप्रवालापिहितैः सुपूजितैः । अकालमूलैर्कलशैरलंकृतं कुशास्तृतं स्थण्डिलमावसेद् द्विजः ॥
रत्न, जल और औषधि से पूर्ण, पल्लव से आच्छादित, अनेक तरह से पूजित, अकाल मूल ( अग्निपाक के द्वारा श्याम वर्ण से रहित अधोभाग वाले) कलशों से अलंकृत चारों दिशायें और कुशों से आच्छादित स्थण्डिल पर बैठे।
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