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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 6
पुरादुदग्यत्पुरतोऽपि वा स्थलं त्र्यहोषितस्तत्र हुताशतत्परः । ग्रहान् सनक्षत्रगणान् समालिखेत्सधूपपुष्पैर्बलिभिश्च पूजयेत् ॥
नगर से उत्तर या पूर्व दिशा में ब्राह्मण हवन करते हुये तीन दिन उपवास करे। बाद में अश्विनी आदि सब नक्षत्रों के साथ सूर्य आदि नव ग्रहों को लिखकर धूप, पुष्प और बलि से उनका पूजन करे।
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