प्राजेशमाषाढतमित्रपक्षे क्षमाकरेणोपगतं समीक्ष्य। वक्तव्यमिष्टं जगतोऽशुभं या शास्त्रोपदेशाद् ग्रहचिन्तकेन ॥
आषाढ़ के कृष्णपक्ष में रोहिणी-चन्द्र का समागम देखकर ग्रहचिन्तक दैवज्ञों को शास्त्र में कथित प्रकार के द्वारा संसार का शुभाशुभ कहना चाहिये। भूत के प्रयोजनाभाव होने के कारण आगे का ही रोहिणीयोग कहना चाहिये
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