यदि गो-प्रवेश (पश्चिम सन्न्या) समय में वन में आये हुये पशुओं में आगे बेल
करता पशु हो तो उस वर्ष बहुत पृष्टि होती है। यदि शबल (कृष्य-चेत) पशु आगे
हो हो मध्यम फल, उसमें कालापन ज्यादा हो तो वृष्टि, मदीयादा होती थोड़ी दृहि
और विसी ही अति होती है।
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