मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 35
गोप्रवेशसमयेऽश्रतो वृषो याति कृष्णपशुरेव वा पुरः । भूरि वारि शवले तु मध्यमं नो सितेऽम्बुपरिकल्पनापरैः ॥
यदि गो-प्रवेश (पश्चिम सन्न्या) समय में वन में आये हुये पशुओं में आगे बेल करता पशु हो तो उस वर्ष बहुत पृष्टि होती है। यदि शबल (कृष्य-चेत) पशु आगे हो हो मध्यम फल, उसमें कालापन ज्यादा हो तो वृष्टि, मदीयादा होती थोड़ी दृहि और विसी ही अति होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें