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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 34
ताडयेद्यदि च योगतारकामावृणोति वपुषा यदापि वा। ताडने भयमुशन्ति दारुणं छादने नृपबघोऽङ्गनाकृतः ॥
यदि चन्द्रमा रोहिणी की योगतारा को भेदित ( शृङ्ग के एक देश से स्पर्श) करे या अपने विम्ब से उसको आच्छादित करे तो भेदित करने से कठोर भय और छादित करने से खी के द्वारा राजा का मरण होता है।
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